रविवार, 9 अगस्त 2026

दीप की पुकार

ओ दियासलाई, तुझसे बड़ा गहरा है नाता
बिन तेरे कोई कैसे मुझे जला पाता
ओ घृत,तुझसे हर पल,हर क्षण मिलूं मै
तुम न हो तो निरंतर कैसे जलूं मै
ओ पात्र तुझे कैसे भुला भी सकूंगा
तुम न हो तो कैसे एक आकर में ढ़लूंगा 
ओ कहां गई प्राणवायु तू मेरी
मोहताज़ तेरे ये आयु है मेरी

तुम सब न हो तो कैसे इक पल जल भी सकूंगा
मैं तुम सबकी ख़िलाफत कर भी न सकूंगा

मगर भूलना न तुम सब एक बात
हम सब को मिलने में किसका है हाथ
मेरा सृजन उसके बिन है अधूरा
जैसे बिन तार हो बेबस तंबूरा

मेरे जीवन में हरदम जो साथ हैं
वो मनुष्य के पावन दो हाथ हैं
हमें मिलते दिल के उद्गार उसके
हमें जलाते निश्चल विचार उसके

हमको गर अपना वंश है बढ़ाना
दुश्मन अंधेरे का दंश है घटाना 
तो उजालों से प्रेम करने का हुनर उसे सिखाना है
मनुष्य को शैतान होने से बचाना है 
मनुष्य को शैतान होने से बचाना है।






मेरे गीत

गीत मेरे क्यारियां,
फूलों की सवारियां
खुशबुओं की बस्तियां,
भंवरों सी हैं मस्तियां
ज़िन्दगी के रंग हैं
करुणा है उमंग है
इनके आवरण में 
खुद को छुपाइए 
आप गुनगुनाइए
और मुस्कुराइए।

विचारबिंदु सा कभी
अपार सिंधु सा कभी
सीधा सरल वेश है
मौलिक परिवेश है
भूख है ये पेट की
तिजोरी है ये सेठ की
आत्मा आधार है
शब्द अलंकार है
चंदन इसे जानकर
ललाट पर सजाए
आप गुनगुनाइए
और मुस्कुराइए

भावना का द्वंद्व है
गद्य ,पद्य छंद है
भावों का ये डिंब है
निर्भीक प्रतिबिंब है
शून्य है अनंत है
अर्थ भी ज्वलंत हैं
मन की दीवार पर 
चित्र सा सजाए
आप गुनगुनाइए
और मुस्कुराइए 


खुद में सिमटकर

दाग उसके इसलिए मिटते नहीं,
आइना पूछता है चेहरा समझकर
शख्सियत उलझी उलझी सी है उसकी
खुद से मिला नहीं खुद में उतरकर
दीवाना है शायद या नया है शहर में
फैलने की बात करता है खुद में सिमटकर

जुगनू

हर शै पर हैं ,गुलामी की सैकड़ों परतें
सदियों से उन्हीं तंग रास्तों को पकड़ते
अंधेरों के आदी,इस कदर हो गए हम
कि नई सोच के जुगनू ,भी आंखों को खटकते।

कोई नहीं सोचता

ज़ाहिर सी बात है पर कोई नहीं सोचता
हर जिस्म एक मंदिर है,हर इंसान देवता
मन के विशाल आंगन में रहता है वो शान से
मज़हब की तंग गलियों में तू जिसे खोजता।

कागज़ के फूल

कागज़ के फूलों से हैं,खून के रिश्ते
देखने सुनने में क्या खूब हैं जचते 
दूर से ही इनका लुत्फ लीजिए जनाब
बहुत करीब से ये असली नहीं लगते

आइना

कौन कहता है आइना हरदम सच दिखाता है
हाथ बदल जाएं तो ये भी बदल जाता है
ख़ुद देखें तो हम खूबसूरत नजर आएं
कोई और दिखाए तो कमियां बतलाता है।