रविवार, 9 अगस्त 2026

खुद में सिमटकर

दाग उसके इसलिए मिटते नहीं,
आइना पूछता है चेहरा समझकर
शख्सियत उलझी उलझी सी है उसकी
खुद से मिला नहीं खुद में उतरकर
दीवाना है शायद या नया है शहर में
फैलने की बात करता है खुद में सिमटकर

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