फूलों की सवारियां
खुशबुओं की बस्तियां,
भंवरों सी हैं मस्तियां
ज़िन्दगी के रंग हैं
करुणा है उमंग है
इनके आवरण में
खुद को छुपाइए
आप गुनगुनाइए
और मुस्कुराइए।
विचारबिंदु सा कभी
अपार सिंधु सा कभी
सीधा सरल वेश है
मौलिक परिवेश है
भूख है ये पेट की
तिजोरी है ये सेठ की
आत्मा आधार है
शब्द अलंकार है
चंदन इसे जानकर
ललाट पर सजाए
आप गुनगुनाइए
और मुस्कुराइए
भावना का द्वंद्व है
गद्य ,पद्य छंद है
भावों का ये डिंब है
निर्भीक प्रतिबिंब है
शून्य है अनंत है
अर्थ भी ज्वलंत हैं
मन की दीवार पर
चित्र सा सजाए
आप गुनगुनाइए
और मुस्कुराइए
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