रविवार, 9 अगस्त 2026

कोई नहीं सोचता

ज़ाहिर सी बात है पर कोई नहीं सोचता
हर जिस्म एक मंदिर है,हर इंसान देवता
मन के विशाल आंगन में रहता है वो शान से
मज़हब की तंग गलियों में तू जिसे खोजता।

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