शनिवार, 3 मार्च 2012

नर्स और मरीज़;Nazm

मरीज़ को जैसे ही होश आया,
सामने एक सुन्दर नर्स  को पाया,
नर्स को देख कर देखता रह गया,
क्या कहूं क्या नहीं सोचता रह गया.

फिर हिम्मत जुटा कर
कुछ मुस्कुरा  कर
कहा नर्स इधर आओ,
तुमसे कुछ कहना है सुनती जाओ,

मुझे अभी अभी समझ में आया है,
शायद तुमने मेरा दिल चुराया है.

नर्स सकपकाई,
थोडा घबराई,
फिर हिम्मत बटोर कर जोर से गुर्राई,
 कहा तू झूठों  का सरदार है,
बहुत ही मक्कार है,

ये बात कहते हुए शर्म नहीं आई
दिल किसी और ने चुराया होगा,
हमने तो बस किडनी चुराई.




शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2012

नदी बह गयी सारी बस पाट रह गए:Ghazal Numa Nazm

नदी बह गयी सारी बस पाट रह गए,
नजाने जोहते हम  किसकी बाट रह गए।

संत सब रंगीन हुए अब राज रंग मे,
कहाँ अब चित्रकूट के वे  घाट रह गए.
...

चला गया सोने वो खा पी के पलंग पे,
हमतो उसूलों की बिनते खाट रह गए।

खरीदने चमकदमक सब शहर चल दिये,
कि धूप बेचते गाँव मे हाट रह गए.
See More

मंगलवार, 14 फ़रवरी 2012

अब क्या कह दें अपना तो जी भर आया है;Ghazal Numa Nazm


अब क्या कह दें अपना तो जी भर आया है,
तुम ने फिर से घुमा कर प्रश्न दोहराया है.

मीठे जल भरे मेघ उपजें कोख से जिसके,
खारा कह कर उसका सबने दिल दुखाया है,

अब किस्से कहें किस्से न कहें कौन सुनेगा,
आखिर बच्चों को चलना हम ने हिं सिखाया है.

शनिवार, 28 जनवरी 2012

अपने जुनूँ को खुद अपने लहू में मिलने दीजिये:Ghazal Numa Nazm

अपने जुनूँ को खुद अपने लहू में मिलने दीजिये,
 ख्वाइशों को डर के पिंजरों से निकलने दीजिये.

कुछ रिश्ते तो रेत हैं मुट्ठी  से सरक जायेंगे,
सच्चे दोस्तों को ना कभी दिल से फिसलने दीजिये.

कितने भि गहरे क्यों न हो ज़ख्म दाग भी न पाओगे,
सब्र रखो मन में बस थोडा वक़्त गुज़रने दीजिये.

तेरे क़दमों तले ये फ़लक आ जायेगा इक दिन,
उड़ निकलने के ख्वाब खुली आँखों में पलने दीजिये.

किस्मत की ठंडी आंच पर रोटी नहीं सिकती कभी,
बाजुओं की तपिश पे हर उम्मीद ढलने दीजिये.

बुधवार, 25 जनवरी 2012

हर किसी के दिल पे अपनी इतनी हिस्सेदारी हो,:Ghazal

हर किसी के दिल पे अपनी  इतनी हिस्सेदारी हो,
जब   कभी रो दें  हँसाना उनकी जिम्मेदारी हो.

ये नसीहत याद रखना काम आएगी बोहत ,
 फासले थोड़े तो रखना चाहे रिश्तेदारी हो।

खुद तुम्हारे आचरण से बच्चे चलना सीखते ,
डगमगाएंगे कदम फिर लाख पहरेदारी हो।








निगाहें फेर ना अब आप की आँखों में बसना है:Ghazal

निगाहें फेर ना अब आप की आँखों में बसना है,
ख़ुशी में झूमना है आपके आंसूं भी   चखना है.

घने पेड़ों के नीचे भी न मुझ को चैन आएगा,
तेरे दिल तक पहुंचना है तेरे कारण ही  थकना है.

रिवाज़ों के कड़े पहरे में हम जो कह  न पाये थे,
किया है तय कि तेरे  सामने वो बात रखना है.

बिना सोचे बिना समझे मैं  सौदे काटता हूँ अब,
बिके चाहे तेरी खातिर यहाँ  जो कुछ भी बिकना है.


दवा "निर्मल" उसे पहले मिले गर जख्म ताज़ा है,
सधे हाथों से सहलाओ मगर तब भी तो दुखना है.


शनिवार, 14 जनवरी 2012

जीवन:Nazm


दुःख हो अगर हंस ले तू,
दूर हो सहर हंस ले तू,
श्रृष्टि  के इस चाक पर,
माटी का है ढेर तू.
चाक चलता रहे सदा,
खिलौना  बनता  रहे सदा.
नैनों के नीर से
माटी न जाए गल..

नदिया बहे कल कल
तू भी हँसता गाता चल...


संकल्प न हो जाये अपंग,
आशाएं न हो पायें भंग.
ठिठक न जइयो चौंक के,
दुःख दर्द के छौंक से,
इस जीवन नदी विराट पर,
सुख दुःख की फिसलन घाट पर,
देख न जइयो फिसल..

नदिया बहे कल कल..
तू भी हँसता गाता चल..

बीती बात का साथ हीं क्या
नए साथ की बात ही क्या.....
जीवन के नित नए खेल तमाशे,
तू निडर बन फ़ेंक पासे,
कलुषित विचार त्याग के,
पुरुषार्थ की बांहे थाम के,
जीवन कर ले सफल,

नदिया बहे कल कल,
तू भी हँसता गाता चल...



\