बुधवार, 21 सितंबर 2022

शुक्रवार, 19 अगस्त 2022

                                                                              भजन 
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी ,हे नाथ नारायण वासुदेवा 

इक आँख में छवि मोहन की  प्यारी 
दूजन मे देखो , राधा दुलारी 

ह्रदय   के कणकण में कुंज बिहारी 
ह्रदय  की धड़कन में राधा दुलारी 

मन की गलिन में जो आये बिहारी 
दूर हुई  सब विपदा हमारी 

आगे बढ़ाओ  चरण मुरारी 
आया ये बालक ,शरण तिहारी 

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी ,हे नाथ नारायण वासुदेवा 








सोमवार, 27 दिसंबर 2021

अपनी आँखों को कभी तो भिगोइए 
संवेदना को अपने दिल मे पिरोइए 
आंसुओं से भी हो सकता है आचमन 
किसी का दर्द दिखे तो ज़रूर रोइए 

बेटों का तो उनकी शादी तक ही खुशनुमा साथ था 
बेटी का तो ज़िंदगी भर काँधे  पे  हाथ था 
विवश होकर स्वाभिमान का चोला मै धर  गया 
अंतिम वक़्त काटने बेटी के घर गया 
उस पर भी मेरे पुत्र मोह का आलम  तो देखिए 
बेटों के नाम सारी वसीयत मै कर गया 



जब ज़िंदगी खड़ी थी सामने ,तब हँसते नहीं बना 
अब मौत खड़ी  है सामने तो रो रहे हैं  आप  

गुरुवार, 5 अगस्त 2021

मुक्तक

दूसरों का दर्द न जाने क्यों फांकते हैं
दर्द दिखा नहीं की आंखों से झांकते हैं
आंखों की देहरी ये फौरन लांघते हैं
आंखों के आंसू है शायद दिल मांजते हैं


मुक्तक

बूंद बूंद करके ये रोज रिस रही है
मौत की चाकी में हर दिन ये पिस रही है
काहे का गुरूर है,कैसा ये अभिमान
ज़िन्दगी की पेंसिल जब रोज घिस रही है