मंगलवार, 27 जून 2023

बंध गए हैं तुम भी देखो माया की इस पाश में 
उलझा लिया है जीवन अगर मगर और काश में 
रेंग भी नहीं पा रहे हो ठीक से तुम भूमि पर 
भेजा था उसने तुम्हे उड़ने को आकाश में। 
अब हमारी दस्तरस से दूर हो गए गाँव 
शहर में तो लोग  चलते नित नवेले दांव 
इस तरह भटकन बढ़ी है ज़िन्दगी में आज 
रखते कहीं हैं हम मगर पड़ते कहीं हैं पाँव 

शनिवार, 25 मार्च 2023

 दूर तक ये  आपके ,साथ साथ जायेंगे 
 मुश्किलों में आपको राह भी दिखाएंगे 
जब कभी भी फ़ैसले  लेने पड़ेंगे आपको 
उस समय  ये शे'र मेरे  ख़ूब याद आएंगे 

बुधवार, 8 फ़रवरी 2023

अंदाज़ अपना सूफियाना है 
 खुली  हवा से दोस्ताना है 
सीलन भरे कमरों से दूर हूँ 
वृहद गगन ही आशियाना है 

बुधवार, 25 जनवरी 2023

साफ़ सुन्दर ज़ेहनो दिल भी स्वार्थ के कोहरे से पट गये 
खेत बांटे,बांटे ज़ेवर ,आख़िरश ये दिल भी बँट गये 
बच्चे थे तो जुड़े हुए थे ,बड़े हुए तो सबसे कट गए 
अपने अपने बच्चे लेकर, भाई सारे  दूर हट गये 
दिल को क्या दे दें,दिलासे के सिवा 
क्या फ़क़ीर के पास है,कासे के सिवा?
ऐसा नहीं है कि, दुर्भाव का बहाव नहीं है 
मगर यहाँ सद्भावों का भी, अभाव नहीं है 
जो बाँध बन कर, नफरत के धारों में खड़े हैं 
महज़ वो, कुछ एक शिलाओं का जमाव नहीं है