मंगलवार, 2 फ़रवरी 2016

छोड़ कर हमको वो गया जबसे ,
 बेकफ़न लाश ढ़ो रहे तबसे !

उम्र सारी गुज़ार दी घर में ,
वक़्ते रुखसत ही वो मिला सबसे !

गोद में  माँ की सर छिपाया तो ,
दिल को ऐसा लगा मिला रब से !

क्या ख़ुशी मैं नहीं तेरी ज़द में ,
तूने देखा नहीं मुझे कब से !

राज़ सब जानता है वो उसके,
चाँद  की बात क्या करें शब से !

कल मिला था वो बाअदब लेकिन ,
वक़्त फिर जब मिला नए ढब से !

 तुमसे  अब क्या कहें सुने "निर्मल "
सी लिए होंठ आज से अब से !











 

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